थॉमस एडिसन की तरह कैसे सोचें

हर आविष्कार हमें तरक़्क़ी की एक अगली सीढ़ी पर ले जाता है। किसी नए आविष्कार को करने के  लिए कुछ भी अलग से नहीं सीखना होता, बल्कि हमें जीवन जीने और उसे समझने के कुछ नए ढंग इज़ाद करने होते हैं। बड़े  वैज्ञानिक इसी तरह जीते हैं। सोचो अगर बल्ब का आविष्कार नहीं होता तो आपकी ज़िंदगी कैसी होती? बल्ब ने न सिर्फ़ कार्यक्षमता का विकास किया है बल्कि हमारे चौबीस घण्टों को सिर्फ़ बारह घण्टे तक सीमित होने से भी बचाया| आज हम बात करने वाले हैं ऐसे ही एक वैज्ञानिक के बारे में जिनकी वजह से हमें बल्ब मिल सका। उनका नाम है थॉमस एडिसन। थॉमस एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1874 को अमेरिका में हुआ। एडिसन ने बल्ब, ग्रामोफ़ोन, रबड़, सिनेमा आदि के आविष्कार किये। एडिसन के नाम 1,093 पेटेंट हैं जो उनकी कड़ी मेहनत के गवाह हैं। बचपन में स्कूल से निकाले जाने के बाद भी उन्होंने जीवन में आगे बढ़ते रहना ही चुना। उन्होंने अपनी माँ से बुनियादी शिक्षा हासिल की। एडिसन में जिज्ञासा और जुनून दोनों मौजूद थे। लेकिन क्या हैं वे  बातें जिनका अनुसरण करके आप भी उन जैसा सोच सकते हैं आइये जानते हैं:

  1. कभी हार न मानना – एडीसन का कहना था कि हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी हार मान लेना है। कोई भी सफलता एक बार में हासिल नहीं होती। पहली बार में अगर आपको वह नहीं मिली इसका कतई मतलब नहीं है कि आगे भी आप उसे नहीं पा सकते। उनका मानना था कि कुछ भी पाने के लिए हमें हमेशा एक और बार या एक से अधिक बार प्रयास ज़रूर करना चाहिए। तो अगर आप गणित के किसी सवाल में अटके हैं और सोचते हैं कि आपसे नहीं होगा, तो ज़रा एक बार और कोशिश कीजिये, अगर तब भी न हो तो एक बार और। कोशिश करने पर कभी न कभी वह आपसे हल ज़रूर हो जाएगा। लेकिन आपने अगर पहली ही बार हल न होने पर छोड़ दिया तो आप आगे उसे हल करने से शायद डरने लगें। सफल होने के लिए तब तक कोशिश करें, जब तक काम न बन जाये। हार मान लेने को एडिसन सबसे बड़ी कमज़ोरी मानते थे।
  1. सकारात्मक दृष्टिकोण –  एडिसन हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखते थे। उन्होंने कभी अपने को किसी काम के लिए असफल नहीं माना। हम सफलता को ग़लत तरह से जीते हैं। अक्सर जो करना होता है, जब वह नहीं कर रहे होते तो हमें लगता है कि हम असफल हो गए। लेकिन ऐसा नहीं है| हो सकता है कि उसी समय आपके पास वे तमाम चीज़ें हों, जो आपने सोची भी न हों। इसलिए अगर आपको अपने कम अंक आने पर दुख हो रहा है तो उस विषय को देखें जिसमें आपके बेहतर नंबर आए हैं। एडिसन का मानना था कि किसी काम को करने में वे कभी असफल नहीं हुए बल्कि उन्होंने ऐसे कई हज़ार तरीक़े निकाले, जो किसी काम के नहीं हैं।
  1. कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं – एडिसन का मानना था कि जो कड़ी मेहनत करता है वही किसी मुकाम पर जा सकता है। उन्होंने अपने जीवन में नौकरी के साथ भी कई प्रयोग किये। ताउम्र कड़ी मेहनत से उन्होंने बहुत कुछ सीखा और नई खोजें की। अगर आप सोचते हैं कि आप शॉर्टकट से पढ़कर पास हो जायेंगे तो यह एक बेहतर बात है। लेकिन अगर पास होने के बाद वही विषय आपको जीवन में अप्लाई करना हो तब आप क्या करेंगे? इसलिए हो सकता है कि मेहनत में आपको पढ़ाई में ज़्यादा समय लगे लेकिन एक बार में सीखा हुआ आपका वह ज्ञान आपको जीवन भर याद रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर आप किसी को भी उसे बता सकेंगे। इसलिए शॉर्टकट न लेकर अपने काम को पूरी तरह करें।
  1. आपका काम बोलता है – एडिसन का मानना था कि यदि आप अपने काम को ठीक तरह से करते हैं तो वह दिखाई देता है। इसके लिए आपको अलग से कुछ साबित करने या बताने की ज़रूरत नहीं होती। आप जो भी करेंगे वह आपके काम में दिखाई देगा। इसलिए अगर आप दूसरे के बढ़ने और बेहतर दिखने की होड़ में भागे जा रहे हैं तो ज़रा थम जाएँ। बेहतर दिखें नहीं बल्कि बेहतर काम करें। इस बात से आपके काम पर कोई खास फ़र्क नहीं पड़ेगा कि आप क्या हैं; सिर्फ़ इस बात से आपके काम पर फ़र्क पड़ता है कि आपका काम कैसा है। तो इमेज़ मेकिंग में समय न गवांकर आप सिर्फ़ अपने काम पर ध्यान दें। वही आपका नाम भी करवाएगा।
  1. हर वह चीज़ करें जो आप सोचते हैं आप नहीं कर सकते – एडिसन मानते थे कि हमें हर वह चीज़ करनी चाहिए जिसके बारे में हमारे भीतर संशय रहता है। ऐसी चीज़ें हमें आगे बढ़ने में मदद करती हैं। साथ ही जब हम वे चीज़ें करते हैं, जिसका हमें लगता है कि हम नहीं कर सकते तो हमारे दिमाग़ की क्षमता भी बढ़ती है। असहज लगने वाली चीजों के प्रति जिज्ञासा को सुलझाने के लिए हमें उन कामों को करके देखना चाहिए। जैसे अगर आप साइकिल चलाने से डरते हैं तो एक बार ज़रूर कोशिश करके देखें। हो सकता है आप न गिरें और ज़िन्दगी भर साइकिल के बैलेंस की तरह अपना बैलेंस भी संभाल सकें।
  1. दृढ़ता – लगभग हर बड़े वैज्ञानिक में यही गुण पाया जाता है। वे जो करना चाहते थे उसमें बहुत दृढ़ थे। उन्होंने अपनी बात को हमेशा तथ्य और तर्क के साथ तो रखा ही, पर साथ में दृढ़ता भी दिखाई। जब आप दृढ़ होते हैं तो आपका आत्मविश्वास पक्का हो जाता है। बगैर दृढ़ता के कोई भी आपको आपकी बात से डिगा सकता है। इसलिए जो भी काम करें या बात कहें उसे दृढ़ता और पूरे आत्मविश्वास के साथ रखें। इससे न सिर्फ़ सामने वाला आपकी बात को समझेगा बल्कि आप हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा सकते हैं। 
  1. काम को मनोरंजन की तरह लें – स्कूल का काम पड़ा है लेकिन कर नहीं रहे हैं। कॉलेज का असाइनमेंट है लेकिन इतना उबाऊ है कि कॉलेज जाने का मन नहीं है। जब तक आप अपने काम को मनोरंजन की तरह नहीं बल्कि बोझ की तरह लेते हैं तब तक आप कुछ भी नया करने के काबिल नहीं रहते। एडिसन कहते थे कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी काम नहीं किया। बल्कि वह किया जो पसन्द था। अधिकतर प्रतिभावान लोग उसी दिशा में सोचते हैं जो उन्हें बेहतर लगती है। वे किसी काम को बोझ की तरह सिर्फ़ कर नहीं देना चाहते बल्कि हर काम को करने में सीखने की लंबी प्रक्रिया होती है। इसलिए काम को बोझ की तरह लेने से बेहतर है कि उसे टास्क या खेल की तरह लिया जाए। 
  1. खाली न बैठें – एडिसन के अनुसार इंतज़ार करने से बेहतर होता है कि हम कुछ करें। हम अक्सर इस सोच में अपना समय गवां देते हैं कि एक दिन करेंगे। लेकिन वह एक दिन आता ही नहीं है। कहा भी गया है खाली दिमाग़ शैतान का घर होता है। कुछ समय भी खाली बैठने से हमारा दिमाग़ आलस की ओर जाता है। इसलिए दिमाग़ को सक्रिय रखने के लिए यह ज़रूरी है कि आप कुछ न कुछ करते रहें। जब हम रोज़ काम करते हैं तभी हम तरक़्क़ी की दिशा में अग्रसर हो पाते हैं। इसलिए निरंतर दिमाग़ को सक्रिय रखें। साइंस समझ नहीं आ रहा तो गणित पढ़ लें, पढ़ना नहीं है तो कोई खेल सीख लें। सिर्फ़ सोते न रहें बल्कि कुछ करें।
  1. कोई भी काम बेकार नहीं होता — एडिसन का मानना था कि कोई भी चीज़ बेकार नहीं होती। बस वह, वह काम नहीं करती जिसके लिए आपने उसे बनाया था। तो अगर आप कुछ अलग बनाने की सोच रहें हैं और आपकी इच्छा से कुछ अलग बन गया है तो निराश न हों। वह शायद किसी दिन आपके किसी और काम आए| यही बात आपकी सोच पर भी है अगर आप कुछ अलग सोच रहे हैं तो उसे व्यर्थ का है या बेकार है न समझें। उसे एक जगह लिखकर रख लें। हो सकता है वह आइडिया या विचार अभी काम का न हो लेकिन आगे आने वाले समय में वही चल निकले। किसी भी काम, सामान या विचार को व्यर्थ न समझें। याद रखें जिस जगह कुछ भी दिखाई नहीं देता वहाँ हवा, अणु, परमाणु सब मौजूद होते हैं। सिर्फ़ आपको तलाश किसी ओर चीज़ की होती है। इसलिए यह बात गाँठ बाँध लें कि हर एक चीज़ किसी न किसी काम की है। जीवन में हर चीज़ का एक अर्थ है।
  2.  काबलियत से अधिक अवसर होते हैं – एडिसन का मानना था कि हमारे पास जितनी काबलियत है, जीवन हमें उससे अधिक अवसर देता है। आप इसे इस रूप में समझ सकते हैं कि आप अपने आपको जितना कमज़ोर मानते हैं उतने हैं नहीं। हर एक व्यक्ति में अवसरों से अधिक गुण होते हैं। अगर आप दस काम कर सकते हैं तो ठीक उन दस कामों के लिए अवसर भी तलाश सकते हैं। कई बार हम यह सोचकर रह जाते हैं कि हम तो मन से करना चाहते थे लेकिन मौका ही नहीं मिल सका। कई बार आये हुए मौके को संदेह के आधार पर छोड़ देते हैं। इस रूप में न जाने कितने मौके हमारे पास आते हैं लेकिन हम उन्हें जाने देते हैं। अगर आप कुछ भी सीखना चाहते हैं तो नया करने में आपका दिमाग़ बहुत काबिल है। जैसा कि विज्ञान भी करता है कि व्यक्ति अपने कुल दिमाग़ का सिर्फ़ कुछ प्रतिशत हिस्सा ही ख़र्च करता है। अगर वह सारा हिस्सा ख़र्च करे तो उससे काबिल कोई होगा ही नहीं। इसलिए अपने आसपास से आते मौकों को देख बहाने न बनाएँ। हम दिमाग़ को जिस तरह चलाना चाहे चल सकते हैं ज़रूरत है सिर्फ़ इच्छा शक्ति की।

एडिसन के बारे में एक कहानी प्रचलित है कहा जाता है कि उनकी शिक्षिका ने उनकी माँ के नाम एक पत्र लिखा जिसमें लिखा था कि वे कमज़ोर हैं और स्कूल में पढ़ने लायक नहीं हैं। तब एडिसन को पढ़ना नहीं आता था। उनकी माँ ने उन्हें कहा कि इसमें लिखा है कि स्कूल तुम्हें पढ़ाने के क़ाबिल ही नहीं है। तुम इतने गुण वाले हो। यह बात एडिसन ज़िन्दगी भर मानते रहें। इसलिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम क्या हैं। महत्वपूर्ण सिर्फ़ इतना है कि आप खुद को कैसा सोचते हैं या कैसा हो जाना चाहते हैं।

~पूर्णिमा वत्स