क़िस्सा: मुंशी प्रेमचंद का पहला नाटक जो उन्होंने अपने मामा से छुटकारा पाने के लिए लिखा था

क़िस्सा: मुंशी प्रेमचंद का पहला नाटक जो उन्होंने अपने मामा से छुटकारा पाने के लिए लिखा था

भारतीय साहित्य संसार में प्रेमचंद वह नाम है जिसके बिना कहानियों और उपन्यासों का ज़िक्र करना भी बेमानी है। हिन्दी साहित्य पढ़ने वाले हममें से शायद हर किसी ने अपनी शुरुआत प्रेमचंद की किसी कहानी से ही की होगी। इसके पीछे का कारण यही है कि उनकी कहानियां आम जनमानस से सबसे जल्दी और आसानी […]

तेनालीराम मटके में

एक बार महाराज कृष्णदेव राय तेनालीराम से इतने नाराज़ हो गए कि उन्होंने उसे अपनी शक्ल न दिखाने का आदेश दे दिया और कहा ,“ अगर उसने उनके हुक्म की अवहेलना की तो उसे कोड़े लगायें जाएंगे।” महाराज उस समय बहुत क्रोधित थे इसलिए तेनालीराम ने वहाँ से जाना ही उचित समझा । अगले दिन […]

सात जूते मारने वाली चमेली

चाननपुर गाँव में चांदकुमारी नाम की एक रूपवती कन्या रहती थी। वह विवाह के योग्य हो गई थी लेकिन अपनी माँ के व्यवहार के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।उसकी माँ का नाम चमेली था जो अपने पति माधो को रोज़ सात जूते मारा करती थी।यह बात दूर – दूर तक के लोगों […]

तेनालीराम की मनपसन्द मिठाई

महाराज, राजपुरोहित और तेनालीराम राज उद्यान में टहल रहे थे कि महाराज बोले , “ऐसी सर्दी में तो खूब खाओ और सेहत बनाओ। वैसे भी इस बार तो कड़के की ठण्ड पड़ रही है। ऐसे में तो मिठाई खाने का मज़ा ही कुछ और है।” जैसे ही खाने पीने की बात शुरू हुई तो राजपुरोहित […]

दूध न पीने वाली बिल्ली

एक बार महाराज कृष्णदेव राय ने सुना कि उनके नगर में चूहों ने आतंक फैला रखा है। चूहों से छुटकारा पाने के लिए महाराज ने एक हजार बिल्लियां पालने का निर्णय लिया। महाराज का आदेश होते ही एक हजार बिल्लियां मंगवाई गयी। उन बिल्लियों को नगर के लोगों में बांटा जाना था। जिसे बिल्ली दी […]

रंग-बिरंगी मिठाइयां

वसंत ऋतु छाई हुई थी। राजा कृष्णदेव राय बहुत ही खुश थे। वह तेनालीराम के साथ बाग में टहल रहे थे। वह चाह रहे थे कि एक ऐसा उत्सव मनाया जाए, जिसमें उनके राज्य के सारे लोग शामिल हों। पूरा राज्य उत्सव के आनंद में डूब जाए। इस विषय में वह तेनालीराम से भी राय […]

मृत्युदंड की धमकी

थट्टाचारी कृष्णदेव राय के दरबार में राजगुरु थे। वे तेनालीराम से बहुत ईर्ष्या करते थे। उन्हें जब भी मौका मिलता तो वे तेनालीराम के विरुद्ध राजा के कान भरने से नहीं चूकते थे। एक बार क्रोध में आकर राजा ने तेनालीराम को मृत्युदंड देने की घोषणा कर दी, परंतु अपनी विलक्षण बुद्धि और हाजिरजवाबी से […]

बूढ़ा भिखारी और महाराज कृष्णदेवराय की उदारता

सर्दियों का मौसम था। महाराज कृष्णदेव अपने कुछ मंत्रियों के साथ किसी काम से नगर से बाहर जा रहे थे। ठंड इतनी थी कि सभी दरबारी मोटे-मोटे ऊनी वस्त्र पहनने के बाद भी काँप रहे थे। चलते-चलते राजा की दृष्टि एक बूढ़े भिखारी पर पड़ी जो हाथ में कटोरा लिए इस कड़कड़ाती ठंड में एक […]

नली का कमाल

राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। महाराज अपने दरबारियों के साथ किसी चर्चा में व्यस्त थे। अचानक से चतुर और चतुराई पर चर्चा चल पड़ी। महाराज कृष्णदेव के दरबार में दरबारियों से लेकर राजगुरु तक तेनालीराम से चिढ़ते थे। तेनालीराम को नीचा दिखाने के उद्देश्य से एक मंत्री ने खड़े होकर कहा – […]