मकौड़े की मंगल यात्रा

मकौड़े की मंगल यात्रा

वह अपनी टोली का सबसे छोटा मकौड़ा था | बाक़ी उसे देखते तो उस पर हँसने लगते | टोली के कुछ मकौड़े उसे चिढ़ाते तो कुछ उसके पीछे उसका मज़ाक उड़ाते | जब वह पैदा हुआ तो माँ ने उसका नाम सबसे अलग रखा | नाम था मिठ्ठू |

अबे नेता है क्या!!!

अबे नेता है क्या!!!

एक बार कोई निर्दलीय आदमी विधायक के चुनाव में खड़ा हुआ था। मीडिया के ये पूछने पर कि “इस चुनाव में आपका क्या मुद्दा है?? वो बड़ी ईमानदारी से बोला- “मेरा चुनाव में कोई मुद्दा नई ऐं,मेरा अपना एक पर्सनल मुद्दा है मुझे पैसे कमाने हैं, इंवेस्ट करना है और विधायक बनके अपनी जो सारी […]

जीव से बुद्धिजीवी

जीव से बुद्धिजीवी

गोरा गोल चहरा, काली आंखों पर काला गोल चश्मा, हल्के बड़े बाल , माथे पर शिकन , खादी का कुर्ता पहने बुद्धिजीवी जी सामने पड़े चारद पांच पन्नो को टटोल रहे थे । आज हम अपने एक कार्यक्रम ‘साक्षात्कार’ के तहत उनसे जीव से बुद्धिजीव बनने तक के सफर पर बात करने वाले थे। हमारे […]

कटी हुई नाक!

कटी हुई नाक!

देखा जाए तो नाक काटने की शुरुआत रामायण काल से ही हुई होगी , क्योंकि वही एकमात्र नाक काटने का प्रसंग आया था। तब से ही नाक काटने की प्रथा प्रचलित होगयी। ख़ैर आधुनिक भारत मे भी नाक काटने की परंपरा बदस्तूर जारी है। अरे रे रे! नाक कट गई मिड्ढा जी की,उनके बेटे को […]

लाल चाय

लाल चाय

आज बहुत समय पश्चात मैं साँयकाल दालान में चाय का रसास्वादन करने बैठा था , अभी दो-तीन चुस्कियाँ ही ली होंगी की देखता हूँ कि मेरे कप में कहीं से एक मक्खी ने आकर जोरदार डुबकी मार दी है । पहले तो बहुत क्लेश हुआ , फिर उसे उसमें तैरते देखा तो ऐसी हँसी आई […]

नेताजी की कुर्सी

नेताजी की कुर्सी

आज काफी जद्दोजहद के बाद नेताजी को कुर्सी पर बैठने का सौभाग्य मिला जिसे उन्होंने बेबाकी से झूठ बोलकर धर्म , जातिवाद का चोगा पहने अपने समझदार वोटरों से हासिल किया था ! नेताजी का चापलूसी की मालाएं पहनाकर जोरोशोरों से स्वागत किया गया ! नेताजी हाथ जोड़े फरियादियों की उम्मीदों को कुचलते हुए शान […]

बेरोज़गारी

बेरोज़गारी

तालाबंदी के दौर में कई नवयुवक, श्रमिक, कामगार व मेहनती बेरोजगार हो गए। एक जिम्मेदार पत्रकार होने के नाते समाज के हर एक तबके तक पहुँचना मेरी जिम्मेदारी है। इसलिए मैं पहुँच गया एक का साक्षात्कार लेने। नाम था ‘क ख ग’। उस व्यक्ति का काम ही ऐसा था कि पहचान छुपानी पड़ती है। खैर […]

मंगल ग्रह पर जीवन

मंगल ग्रह पर जीवन

बात वर्तमान से नहीं भविष्य से शुरू करते हैं। मंगल ग्रह पर शर्मा जी को आये करीब 5 साल हो गए थे,वो यहाँ ये सोचकर आये थे कि कम से कम यहाँ उनके पड़ोसी गुप्ता जी रात के अंधियारे में उनके घर के सामने कचरा तो नही डाल कर जाएंगे और सुबह उनकी नींद दोनों […]

शेखचिल्ली की खीर

शेखचिल्ली पूरा बेवक़ूफ़ था और हमेशा बेवकूफी भरी बातें ही करता था। शेख चिल्ली की माँ उसकी बेवकूफी भरी बातों से बहुत परेशान रहती थी। एक बार शेखचिल्ली ने अपनी माँ से पूछा कि माँ लोग मरते कैसे हैं? अब माँ सोचने लगी कि इस बेवक़ूफ़ को कैसे समझाया जाए कि लोग कैसे मरते हैं, […]

शेखचिल्ली और कुएं की परियां

एक गांव में एक सुस्त और कामचोर आदमी रहता था। काम – धाम तो वह कोई करता न था, हां बातें बनाने में बड़ा माहिर था। इसलिए लोग उसे शेखचिल्ली कहकर पुकारते थे। शेखचिल्ली के घर की हालत इतनी खराब थी कि महीने में बीस दिन चूल्हा नहीं जल पाता था। शेखचिल्ली की बेवकूफी और […]