किताबी कीड़ा

किताबी कीड़ा

चीज़ें हमेशा से फैली रहती | उसने कभी नहीं सोचा था  एक दिन वह समेट नहीं पायेगा | फैलाव उसे पसंद था | बहुत दिन तक चादर को उसने वहीं रख छोड़ा था, जहाँ जिस कोने में वह पड़ी थी | अगर सोने की जगह की बात करो तो किताब ठीक वहाँ थीं, जहां उन्हें कभी नहीं होना चाहिए| यानी बिस्तर पर फैली हुई| किताबों  से पूरा बिस्तर भरा पड़ा था| कहाँ बिस्तर है, कहाँ किताब उसे कुछ होश ही नहीं रहता| सारा दिन सोने के बाद रात के वक़्त जब उसकी मदहोशी टूटती, वह किताब […]

समय की उपयोगिता

समय की उपयोगिता

सारी रात वह किताब को सिरहाने लगा सोता रहा | सुबह उठा तो घड़ी की ओर उसकी नज़र पड़ी, और वह तेज़ी से उठ बैठा| सुबह के ठीक आठ बजे थे| इतनी देर तक सोना उसकी आदत में शुमार तो नहीं था लेकिन वो करता भी क्या,  इम्तेहान सिर पर थे | दिनभर घर में […]