द एक्स फेक्टर

कुछ जटिल पल ऐसे होते हैं जब हम अपनी धारणा बनाकर जीते हैं और समय उन धारणाओं को तोड़ एक नई तरह की सोच हमें थमा देता है। आज की कहानी उसी सोच के बनने और बिगड़ने पर।

मां को पत्र

प्यारी अम्मी, तुमको गए चौदह साल हो गए। कहते हैं जीवन गहराई से जीने वालों को मौत का कोई डर नहीं होता… तुम भी ऐसी ही थी । तुम जानती थी, गिनती के कुछ ही दिन बचे हैं तुम्हारे पास इसलिए पहले ही अपनी ज़िम्मेदारियों की चाभी पापा को सौंप दी। पापा समझ नहीं पाए, […]

पलाश के फूल

पलाश के फूल

हम सब प्रकृति द्वारा बनाई गई कलाकृतियाँ हैं। सबके भीतर आधा शिव का और आधा पार्वती का अंश है। किसी में ज़्यादा स्त्री है तो किसी में ज़्यादा पुरुष। किसी में दोनों समान रूप से मौजूद है । जो अलग है वह भी उतना ही मनुष्य है जितना कि सामने वाला। इसलिए किसी भी व्यक्ति विशेष की न तो हमें खिल्ली उड़ानी चाहिए न उनसे सद्भाव ही रखना चाहिए | आप क्या है से ज़्यादा मायने यही रखता है कि आप दुनिया को या देकर जा रहे हैं। अपने आसपास के लोगों को समानता की नज़र से देखें और स्वीकार करें। दुनिया पलाश के फूल है लाल और चमकदार।

कर्फ़्यू

कर्फ़्यू

कल से देश भर में जनता कर्फ़्यू लग जाएगा | यह ख़बर हर जगह फैल गई थी | घर के ठीक सामने रहने वाले एक भैया फ़ोन पर कह रहे थे –“ सब गाँव वालों को बता दो ,कल देश में जनता कर्फ़्यू है कोई घर से बाहर न निकलने पाए |”

बेलें

बेलें

दरवाज़े से कुछ सीढ़ियाँ ऊपर की ओर जाती थी| बहुत दूर तक ऊपर चाँदनी की बेल लटकी रहती | सुदेश ऊपर जाती, तो उसे लगता जैसे यह बेल ही उसकी ज़िन्दगी हो | रात होते-होते सीढ़ियों से गुजरना किसी चमत्कार से कम न था | हर चढ़ती हुई सीढ़ी और कदम के साथ सब कुछ […]

सिंगल मदर

सिंगल मदर

“मैं माँ बनना चाहती हूँ । यह मेरी इच्छा है कि मैं भी बच्चे के द्वारा माँ कहकर पुकारी जाऊं। उसे प्यार करूं।” “तुम माँ कैसे बन सकती हो। अभी तो तुम्हारी शादी भी नहीं हुई है,” रागिनी के माँ बनने की लगातार ज़िद पर माँ ने उसे समझाया। “मां, माँ बनने के लिए मैं […]

मोमबत्तियाँ

मोमबत्तियाँ

मोमबत्तियों से एक पूरी अलमारी अटी पड़ी थी। विनय ने आकर अलमारी खोली तो सब की सब मोमबत्तियाँ बाहर आ गिरीं। “इस बार क्या सिर्फ़ मोमबत्तियाँ ही लगेंगी?” सविता ने पूछा तो विनय ने कुछ तैश में आकर कहा,  “इस बार तो सब की सब ख़त्म कर दूँगा जलाकर, आख़िर अलमारी भी तो खाली करनी […]

बादल की दोस्ती

बादल की दोस्ती

हर दिन नहीं आते थे बादल | किसी-किसी रोज़ ही जब वे आते भोलू उन्हें पकड़ कर उड़ जाता | बादल पर बैठकर उड़ा जा सकता है, यह बात उसके अलावा किसी को मालूम नहीं थी| होती भी कैसे ? भोलू ने न किसी को बताई और न ही बादलों ने ही किसी से कहा […]