भूख को मार दो

भूख को मार दो

अपने पांच वर्षीय बेटे विकास द्वारा पास के किराना दुकान से बिस्कुट चोरी करने की बात सुनकर उसकी मां ने उसे थप्पड़ लगाया और बोली, “तुझे चोरी करने की क्या जरूरत है? घर में खाना नहीं बनता क्या? यह चोरी करने की लत तुझे लगी कहां से?” विकास की आंखों से आंसुओं की धारा बह […]

कतरन

कतरन

हम भले ज़िन्दगी को कितना बाँट ले लेकिन हमारी दुनिया का एक सच यह भी है कि हम पहले आये और बाद में हमारे विश्वास ! आदमी होने में आदमियत से बड़ा कुछ नहीं । आज की कहानी भी इसी आदमियत के नाम है। तो आइए जानते हैं आज की कहानी किसकी है ?

ख़त की प्रेम कहानी

ख़त की प्रेम कहानी

एक फौजी जब अपने कैम्प पहुंचता है, तब उसे अपने पास एक खत मिलता है। यह खत उसकी प्रेमिका ने बड़ी ही चाहत से लिखा है:  तुम्हारे जाने का वक्त करीब आ रहा है। एक ओर धड़कनों ने बगावत करना शुरू कर दिया है, वहीं मन बेचैन-सा होने लगा है। अब मेरे फोन समेत दिनचर्या […]

अमन का गुब्बारा

अमन का गुब्बारा

10 वर्षीय अमन की भोली आंखों में अभी भी नववर्ष का उन्माद चढ़ा हुआ था कि वह भी आज सारे गुब्बारे बेचकर, मेले में लगे स्टॉल पर जाकर बंदूक से गुब्बारे फोड़ेगा और खिलौना जीतेगा। सड़क की ओर खड़े होकर वह आने-जाने-वाले लोगों को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा था। उसे यकीन था कि […]

सर्दियों की तीसरी आंख

सर्दियों की तीसरी आंख

आठ वर्षीय बसंत हर रोज जब अपने पिता के साथ दुकान से वापस लौटता, उसकी नजर फुटपाथ पर बैठे लोगों पर जा टिकती। ठंड से ठिठुरते लोगों को देखकर उसकी आंखें नम हो जातीं, मगर अपने आंसुओं को आंखों में भींचे हुए, वह अपने पिता के साथ चलता रहता।बसंत लॉक डाउन होने के बाद दुकान […]

तुमसे जाना

तुमसे जाना

हमें अक्सर लगता है एक प्रोटेस्ट से एक आवाज़ से क्या कुछ बदल सकता है | क्या बदलाव एक सवाल से नहीं आता । हमें मालूम भी नहीं चलता कैसे और कब हमारा आसपास हमें बदल देता है ,ज्योत्स्ना के मिलने से वह भी बदला था और ज़िन्दगी को देखने का उसका नज़रिया भी आइये जानते हैं क्या है पूरा मांजरा।

पलाश के फूल

पलाश के फूल

हम सब प्रकृति द्वारा बनाई गई कलाकृतियाँ हैं। सबके भीतर आधा शिव का और आधा पार्वती का अंश है। किसी में ज़्यादा स्त्री है तो किसी में ज़्यादा पुरुष। किसी में दोनों समान रूप से मौजूद है । जो अलग है वह भी उतना ही मनुष्य है जितना कि सामने वाला। इसलिए किसी भी व्यक्ति विशेष की न तो हमें खिल्ली उड़ानी चाहिए न उनसे सद्भाव ही रखना चाहिए | आप क्या है से ज़्यादा मायने यही रखता है कि आप दुनिया को या देकर जा रहे हैं। अपने आसपास के लोगों को समानता की नज़र से देखें और स्वीकार करें। दुनिया पलाश के फूल है लाल और चमकदार।

मुजरिम

मुजरिम

लड़कियाँ ताउम्र सिर्फ़ घर तलाशती रहती हैं ,न उन्हें ठीक से कोई देश मिला न घर । लड़के हमेशा लड़के बनने में लगे रहे न वे प्रेमी बन सके ,न भाई ,न ठीक से कुछ और। एक पूरा समाज हमें कुछ न कुछ बनाने में लगा है इस बनने की प्रक्रिया में कितना कुछ टूटता है आज की कहानी उसी ट्रैजेडी के नाम।